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आर्थिक संधि या शराब बंदी? – दोहरे मापदंडो का समाज - द्वारा - श्राबोनी पुरी

इस लॉक डाउन  के दौरान अक्सर ही शराब सुर्ख़ियों में रही है, वो भी गलत कारणों से। यहीं से चलते हैं उस इतिहास की ओर, जिसके पन्ने अक्सर सुनहरे लगते हैं पर कभी कभी हमें पीछे मुड़के उन सुनहरी परतों के नीचे जमे अनसुने, अनजाने रंगों से रूबरू होना चाहिए। क्यूंकि इंसानी फितरत है राय कायम करना; गलत, सही, दशा, दिशा से परे, बस राय कायम कर लेना।  ऐसा ही एक विशेष विलक्षण वस्तु मेरा ध्यान आकर्षित करता है जिस पर राय कायम करना हमारा अधिकार सा बन जाता है।
राजनीती के समान ही शराब भी विवादों से परे नहीं है। शराब (अल्कोहल) का पहला स्वरुप बियर स्पेस पर जा पहुंचा। विज्ञान और उन्नत तकनीक, मंगल ग्रह में अल्कोहल को पुनर्जन्म देने का प्रयास एक सदी से कर रहे हैं। परन्तु पाषाण युग या निओलिथिक ऐज से लेकर कलयुग तक मानी सभ्यता विज्ञान, आविष्कार, कला, आत्ममंथन और अनगिनत आंदोलनों की सृजनकर्ता, शराब, एक मंद लौ के दिए के समान है। अल्कोहल के बिना शतकों से सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पृष्टभूमि अधूरी रही है। जहाँ टेम्परेंस  मूवमेंट (संयम) अपने नए नए करतब दिखाता है वहीँ शराब अपने लौ की आंच तेज़ कर देती है।
अंडा पहले या मुर्गी जैसा ही विवादस्पद है की शराब पहले या मानव जाति। बार्ली फ्रॉम बियर थ्योरी के अनुसार यह युक्ति की बियर (शराब) मानव जाति के उत्थान में मुख्य प्रेरक हैं काफी संतोषप्रद है।
चर्चा यह नहीं है की अल्कोहल का सेवन करना चाहिए या नहीं या फिर यह नैतिक या अनैतिक है? प्रश्न यह है की ९००० इसा पूर्व से आज तक की दुनिया इसकी किन विशेषताओं के कारण इस से अपने सम्बन्ध को लेकर विवश हो जाती है?
आज से लगभग १००००० वर्षों पूर्व मानव जाति अपने शारीरिक रचना में प्रकाशित हुए और ९०००० वर्षों तक के लिए शिकार कर जीवित रहे।  परन्तु ९००० इसा पूर्व में घटी एक अद्भुत घटना संपूर्ण मानव जाति का सुनहरा भविष्य और रुपहला इतिहास रच डाला।
                                         प्रार्थना है की निनसाकि आपके साथ रहे, 
                                        वह आपको बियर और वाइन से आबाद रखे,
                                        उनकी देन आपको सदा खुशियों से सराबोर रखें,
                                   -- द हाइमन ऑफ़ निनसाकि : मेसोपोटामिया में बियर की देवी
वैज्ञानिकों एवं पुरातत्व विशेषज्ञों ने यह तथ्य दिया की मेसोपोटामिया (इराक) की ज़मीन पर पहली बार कृषि क्रांति (एग्रीकल्चरल रेवोलुशन) अपने साथ कभी ना थमने वाला दौर लेके आया था।
यह क्रांति बियर की वजह से थी। बियर बार्ली से बनती है : इस खोज ने इतिहास को दो हिस्सों में बाँट दिया। BB (बिफोर बियर - बियर के पूर्व ), या AB (आफ्टर बियर - बियर के बाद)। इस कृषि क्रांति के बाद आविष्कार और संभावनाओं की बाढ़ सी आ गई। कृषि प्रणाली, कृषि के काम में आने वाले औज़ार, सिंचाई प्रणाली, बस्तियां, घर, समूह, अनाज और बियर को वृस्तृत इलाकों में ले जाने के लिए परिवहन प्रणाली, अनाज को बाँटने और काम में लेने के लिए गणित एवं माप प्रणाली, बहीखाता, लेखन, लिपि, और ना जाने क्या क्या। यह देन है उस व्यवस्था को सुवर्णित  करने के लिए जो कृषि और बियर लेके आए थे।
बियर और विज्ञान एक दूसरे के पूरक रहे हैं। पोषक तत्वों से भरपूर, इजिप्ट में एक संपूर्ण आहार, कभी धन, कभी ईश्वरीय भेंट, कभी दवाई, कभी दूषित पानी से राहत देती बियर, मानव सभ्यता के लिए वरदान से कम ना थी। १८५० में लूई पाश्चर नामक वैज्ञानिक ने पहली बार अपनी खोज से यह बताया की कीटाणु बिमारियों का कारण हैं। दरअसल वो यह जानना चाहते थे कि उनकी बियर ख़राब कैसे हुई। और ऐसे खोज हुई बैक्टीरिया नामक कीटाणु की, जिनकी अनगिनत वैक्सीन देन हैं। और पॉस्चराइजेशन से हम सभी परिचित हैं। इस ऐतिहासिक खोज से पहले डॉक्टरों को यह भी नहीं पता था कि हाथ नहीं धोने से कीटाणु फैलते हैं, जिनके कारण बहुत सारी बीमारियां होती हैं। जब जर्मन लागर बियर लेकर अमेरिका आए, ठन्डे तापमान कि ज़रूरत आयी, और आविष्कार हो गया रेफ्रीजिरेटर का।
अब तक अपनी जहाज़ी सैरों से अलग अलग जगह खुद को व्याप्त कर रही थी बियर।
इक्कीसवी सदी का दौर था व्यापक उत्पादन (मास प्रोडक्शन) का। अमेरिका ने पहली बार फैक्ट्री बनाई बियर कि बोतल बनाने की। और इसी के साथ अंत हुआ लम्बे समय से चले आ रहे चाइल्ड लेबर का जो बियर के लिए कांच की बोतल बनाया करते थे। मिलर और कूर नाम की बियर कंपनियों ने अमेरिका को ऑटोमेटेड बना दिया था। माना जाता है की १७७३ में अमेरिकन रेवोलुशन में भी बियर ने लोगों को संगठित कर देश आत्मबोध से परिपक़्व कर दिया था।
उस युग से इस युग तक बियर की संरचना में बदलाव इंसान ही करता आया है पर दुखद बात यह है कि हम वक़्त के साथ बदल ही नहीं पाए। और भविष्य दृष्टा अनायास ही भविष्य का संहारक बन गया। स्टोन ऐज से इनफार्मेशन ऐज तक अल्कोहल ने दुनिया को उसके कई आयाम दिए और हमने दी ललचाई निगाहें। कुछ जानकारियां मंगल ग्रह पर जगह बना रही है और कुछ गलत जानकारियां जान ले रही हैं। आने वाला वक़्त उसी का है जो संयम के साथ सुनहरे इतिहास का सम्मान करे और नया भविष्य अपनी सूझबूझ से जानकारियों के साथ संवारें।

Comments

  1. Beena Shekhawat May 24, 2020 10:48 PM

    Good work shraboni puri mam analysis statistical data represention and collection of wast history is marvelous blog layout Happy reading keep posting always looking forward to new copies

  2. Sachinkumar May 25, 2020 04:28 AM

    Nice thought

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