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दूध और श्वेत क्रांति - द्वारा - श्राबोनी पुरी

हम सभी सुबह की शुरुआत दूध खरीदने से करते हैं। यदि कभी दूध ना मिला तो हमारी  हालत भी  खसीयानि बिल्ली जेसी हो जाती हैं। हमारी भारतीय संस्कृति में दूध को अमृत तुल्य माना जाता है। शिव जी का अभिषेक हो या कृष्णा का माखन मिश्री का भोग । बड़ों के आशीर्वाद में भी इसका इस्तेमाल होता आया है जेसे की दूधो नहाओ, पूतों फलों।  हमारे देश में तो दूध की नदियां बहती हैं ये कहावत आज के परिवेश में सही साबित हो रही हैं क्योंकि हम डेयरी उद्योग में अग्रणी भूमिका में हैं।
आज विश्व दूध दिवस पर हमें  पद्म विभूषण डॉ वर्गीज कुरियन को याद करना होगा जिन्होंने देश में धवल/श्वेत क्रांति की शुरुआत की थी। डॉ वर्गीज ने अमूल को एक डेयरी ब्रांड बना दिया है जो डेयरी विकास से जुड़े हजारों किसानों को रोजगार दे रहा है। आज देश भर में 1.6 करोड़ से ज्यादा दूध उत्पादक अमूल से जुड़े हैं ये देशभर में 1,85,903  डेयरी को-ऑपरेटिव सोसायटियों के जरिए अमूल तक अपना दूध पहुंचाते है। अमूल की 28 स्टेट मार्केटिंग फेडरेशन करोड़ों लोगों तक उसका दूध पहुंचाती हैं।
आज के इस महामारी के दौर में दूध हमें रोगों से लड़ने की ताकत देता है। अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगी कि दूध पीते चलो गीत गाते चलो।
धन्यवाद

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